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सोमवार, 4 अगस्त 2008

बेतुकीः मुद्दों की हो गयी बरसात

बधाई हो। दो-चार बार बधाई हो। ऊपर वाला जब भी देता है तो छप्पर फाड़ कर ही देता है। कमल वालों के हाथ से एक मुद्दा छिना नहीं कि दूसरा आ गया। किस्मत अच्छी है भाई जी। ऐसे ही लगे रहे तो लाल वाले कृष्ण जी का सपना भी साकार हो जाएगा। बहुत दिनों से रात को सपने आ रहे हैं। अब गद्दी मिली कि अब मिली। सपने में कई बार तो शपथ भी ले लिये होंगे।
खुदा ने बिल्लियों को भी पेट दिया है तो कभी-कभी तो छींके में कंकड़ मारेगा ही। पहले महंगाई का मक्खन फैलाया तो कभी आतंकवाद की रबड़ी जैसा मुद्दा झोली में डाल दिया। लाल वाले कृष्ण जी पर लगता है भोले नाथ भी मेहरबान हैं। जम्मू कश्मीर में ऐसी आग लगायी कि कमल की झोली में वोट ही वोट नजर आने लगे।
भैया, पर सावधान रहना। सामने भी नटखट मनमोहना है। लाल वाले कृष्ण की किस्मत अच्छी है तो नटखट तो किस्मत पर ही जी रहे हैं। किसी ने सपने में भी नहीं सोचा कि गद्दीनशीं होंगे लेकिन बिल्ली के भाग्य से छींके ही छींके टूट गये। अब फिर भैया मेरा मैदान में डटा है। जब तक गांधी माता-गांधी भैया में आस्था है तब तक कुछ भी हो सकता है। भगवान उनका भला करे और हमारा भी। हम ऐसे ही वोट देते रहें और वो संसद में बिकते और खरीदते रहें।

पंकुल

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